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Wednesday, June 3, 2020

Generations of Computer - CCC

Generations of Computer - (कंप्यूटर की पीढियां)

   (I) First Generation (1946-1954)

    प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes) का प्रयोग किया जाता था|  इस पीढ़ी के कंप्यूटर का आकार बहुत ही बड़ा होता था और अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होने के कारण  इस को ठंडा रखने के लिए एयर कंडीशन का उपयोग किया जाता था| इनकी कार्य करने की गति बहुत धीमी थी तथा इनका मूल्य भी बहुत अधिक होता था| इस पीढ़ी के कंप्यूटर में  ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग नहीं किया जाता था जिसकी वजह से बहुत से कार्य स्वयं ही करने पड़ते थे जिनके लिए अलग-अलग तरह के कई स्विच का इस्तेमाल होता था|



इस में प्रयोग की जाने वाली वेक्यूम ट्यूब की खोज  ली  डीफॉरेस्ट (Lee DeForest) 1908 में की थी| इस पीढ़ी के कंप्यूटर में इनफॉरमेशन को स्टोर करने के लिए मैग्नेटिक ड्रम और मैग्नेटिक कोर का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें मैग्नेटिक कोर प्राइमरी मेमोरी की जगह प्रयोग किया जाता था|  इसमें इनपुट के लिए पंच कार्ड और पेपर टेप का उपयोग किया जाता था तथा आउटपुट  प्रिंटआउट के रूप में मिलता था|  इस पीढ़ी में आउटपुट को किसी भी तरह की स्क्रीन पर डिस्प्ले नहीं किया जाता था|
  • The First Generation of Computers used Vacuum Tubes
  • The Vacuum tube was developed by Lee DeForest in 1908
  • Storage :- Magnetic Drums and Magnetic Core
  • The input to the computer was through punched cards and paper tapes
  • The output was displayed as printouts.
इस पीढ़ी के कुछ कंप्यूटरों के नाम इस प्रकार हैं:- 
  • ENIAC
  • EDVAC
  • UNIVAC-1
  • UNIVAC-2
  • IBM-701
  • IBM-650
   नुकसान (Disadvantages) :  आकार बहुत बड़ा था,  अत्यधिक महंगे होने के कारण सामान्य लोगों की पहुंच से दूर थे, अधिक ऊष्मा उत्पन्न होने के कारण ठंडा करने के लिए एयर कंडीशन का उपयोग जरूरी था ,  कार्यक्षमता बहुत ही कम थी|

    (II) Second Generation (1956 to 1963)

    दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब  की जगह ट्रांजिस्टर का उपयोग किया जाने लगा था|  जो वैक्यूम ट्यूब की तुलना में आकार में छोटा और कार्य क्षमता अधिक थी|  इस पीढ़ी के कंप्यूटर का आकार प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर की तुलना में छोटे और अधिक कार्य क्षमता तथा विश्वसनीय होते थे  और इनके निर्माण में खर्च में भी कमी आई थी|   यह कम उत्पन्न करते थे ऊष्मा  फिर भी इन को ठंडा रखने के लिए एयर कंडीशन की आवश्यकता पड़ती थी|  इस पीढ़ी के कंप्यूटर में प्राइमरी मेमोरी के स्थान पर मैग्नेटिक कोर  का उपयोग किया जाता था  तथा सेकेंडरी मेमोरी के स्थान पर मैग्नेटिक टेप का उपयोग होता था|  इस पीढ़ी में भी आउटपुट प्रिंटआउट के रूप में मिलता था|  इस पीढ़ी में कुछ हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज काफी विकास हुआ  जैसे FORTRAN, ALGOL  और COBOL|
  1. Transistors replaced the Vacuum Tubes.
  2. विलियम शॉकले (William Shockley) ने ट्रॉंजिस्‍टर का आविष्‍कार सन् 1947 में किया था
  3. Primary memory : magnetic cores, Secondary memory : magnetic tape
  4. The input to the computer was through punched cards and paper tapes
  5. The output was displayed as printouts.
  6. Used high-level languages such as FORTRAN (1956), ALGOL (1960) & COBOL (1960 – 1961).
इस पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर इस प्रकार हैं:-  
  • IBM 1620
  • IBM 7094
  • CDC 1604
  • CDC 3600
  • UNIVAC 1108
नुकसान (Disadvantages) :  आकार बहुत बड़ा था,  अत्यधिक महंगे होने के कारण सामान्य लोगों की पहुंच से दूर थे, अधिक ऊष्मा उत्पन्न होने के कारण ठंडा करने के लिए एयर कंडीशन का उपयोग जरूरी था ,  कार्यक्षमता बहुत ही कम थी|

   (III)Third Generation (1964 to 1971)

    तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों में ट्रांजिस्टर के स्थान पर इंटीग्रेटेड सर्किट (integrated Circuit) का उपयोग किया जाता था,  जिनको सिलिकॉन चिप भी कहते हैं| IC  चिप आकार में बहुत छोटे होते थे और एक चिप पर सैकड़ों ट्रांजिस्टर के बराबर कार्यक्षमता  थी | आईसी चिप से बने कंप्यूटर आकार में छोटे तथा तीव्र गति और विश्वसनीय कंप्यूटर थे|
इस पीढ़ी के कंप्यूटरों  इंफॉर्मेशन को स्टोर करने के लिए स्टोरेज डिवाइस जैसे डिस्टैब आदि का भी विकास हुआ|  इसी पीढ़ी से मल्टीप्रोग्रामिंग और मल्टी प्रोसेसिंग का भी विकास संभव हो गया था|  इस पीढ़ी में इनपुट डिवाइस कीबोर्ड और माउस का भी उपयोग होना प्रारंभ हो गया था जिसकी वजह से कंप्यूटर को दिए जाने वाले निर्देशों में सरलता आई थी|  इसी पीढ़ी ने आउटपुट के लिए मॉनिटर जैसे आउटपुट डिवाइस का भी विकास हुआ और इनका उपयोग प्रारंभ हो चुका था|  इसमें हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के साथ-साथ ऑपरेटिंग सिस्टम का भी विकास हुआ जिससे कंप्यूटर की कार्य करने की क्षमता में काफी तेजी आई| इस पीढ़ी में उपयोग होने वाली मुख्य चिप IC की खोज Jack Kilby ने 1959 में की थी|
  • IC replaced the Transistors.
  • The IC was invented by Jack Kilby  in 1959.
  • Primary memory : magnetic cores, Secondary memory : magnetic disc
  • The input to the computer was through Keyboard  and Mouse
  • The output was displayed as Monitor.
  • Used high-level languages such as FORTRAN (1956), ALGOL (1960) & COBOL (1960 – 1961), BASIC.
इस पीढ़ी के कुछ कंप्यूटरों के नाम इस प्रकार हैं:- 
  • IBM-360 series
  • Honeywell-6000 series
  • PDP (Personal Data Processor)
  • IBM-370/168, TDC-316
    नुकसान (Disadvantages):-  IC आईसी चिप  के रखरखाव की अधिक आवश्यकता थी|

   (IV) Fourth Generation (1971 to 1980)

      इस पीढ़ी के कंप्यूटर में LSI  और VLSI  तकनीकी का उपयोग किया जाता है| कल भी इस पीढ़ी के कंप्यूटर का उपयोग होता है| इस में प्रयोग होने वाली चिपको माइक्रोप्रोसेसर के नाम से जानते हैं जिस की कार्यक्षमता बहुत अधिक होती है,  जिस हजारों लाखों ट्रांजिस्टर के बराबर कार्य करने की क्षमता होती है|  इस पीढ़ी के कंप्यूटर आकार में बहुत छोटे होते हैं जो एक सामान्य मेज पर रखे जा सकते हैं| बिजली की खपत बहुत कम होती है तथा  इन को ठंडा रखने के लिए एयर कंडीशन की आवश्यकता नहीं पड़ती| इनका मूल्य कम होने की वजह से  आम नागरिक भी इसका उपयोग कर सकते हैं| इसी  पीढ़ी में MS-DOS, MS Window  जैसे बहुत ही प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम का विकास हुआ जिसकी वजह से कंप्यूटर की कार्य क्षमता कई गुना बढ़ गई| स्पीडी में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस टेक्नोलॉजी काफी विकास हुआ|
  1. Use the Large Scale Integration (LSI) and the Very Large Scale Integration (VLSI) technology.
  2. MS-DOS and MS Windows developed during this time.
  3. All the high-level languages like C, C++, DBASE etc
  4. Graphical User Interface (GUI) technology
इस पीढ़ी के कुछ कंप्यूटरों के नाम इस प्रकार हैं:- 
  • IBM 4341
  • DEC 10
  • STAR 1000
  • PUP 11

   (V) Fifth Generation(1980- continued)

     इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में ULSI  तकनीकी का प्रयोग किया जाता है तथा साथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी का भी उपयोग किया जाता है जिससे कंप्यूटर की कार्य करने की क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता काफी बेहतर हो जाती है तथा कंप्यूटर मनुष्य की तरह सोचने और निर्णय लेने की भी क्षमता विकसित होती है|  हालांकि इस  पीढ़ी पर अभी कार्य चल रहा है जिसमें काफी सफलता भी मिली है और आने वाले दिनों में बहुत कुछ कंप्यूटर में परिवर्तित होता हुआ दिखाई देगा| इस पीढ़ी के सुपर कंप्यूटर जैसे कई उदाहरण उपलब्ध हैं, कार्य क्षमता सामान्य कंप्यूटर की तुलना में कई  हजार गुना ज्यादा होती है, जिनका उपयोग मुख्यतः वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों में किया जाता है|
  1. Use the Ultra Large Scale Integration (ULSI).
  2. 64 bit microprocessors have been developed during this period.
  3. All the high-level languages and Natural language processing.
  4. Advancement in Parallel Processing
इस पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर के उदाहरण इस प्रकार हैं:- 
  • Desktop
  • Laptop
  • Notebook
  • Ultra Book
  • Chrome Book

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